माह-ए-रमजान तो हर दिल को सजा देता है
नेमतें हमको यह दे करके मजा देता है।
मरहबा कह के पुकारो सभी इमान वालों
उम्र भर की यह खताओं को मिटा देता है।
मोमिनो! कद्र करो इसकी इबादत करके
एक नेकी को सततर यह बना देता है।
कैसी रौनक है मसाजिद में नमाजी हैं सभी
रोजेदारों कि यह फरहत को बढ़ा देता है।
वक्त इफ्तार है और लब प दुआ है जारी
अपने लम्हों को यह मकबूल बना देता है।
शब मैं कर करके दुआ हम हैं राजा के तालिब
दिन को पाकीजा यह ख्वाहिश से बना देता है।
अहले सर्वत है तो खैरात अदा कर असअद
सर पर आई हुई आफत को हटा देता है।

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